सुरेश रैना को प्लेयर ऑफ़ द मैच चुना गया
सुरेश रैना की आतिशी पारी के बूते चेन्नई सुपरकिंग्स ने आईपीएल के एक मुक़ाबले में राजस्थान रॉयल्स को 38 रनों के भारी अंतर से हरा दिया है.
चेन्नई की टीम ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए निर्धारित बीस ओवरों में पाँच विकेट पर 164 रन बनाए.
इसके जवाब में राजस्थान रॉयल्स की पूरी टीम बीसवें ओवर में 126 रन बनाकर आउट हो गई.
चेन्नई सुपरकिंग्स की ओर से एल बालाजी ने चार विकेट लेकर राजस्थान रॉयल्स की टीम को ज़बर्दस्त झटका दिया.
राजस्थान रॉयल्स ने लक्ष्य का पीछा शुरु किया तो शुरु में ही उसे झटके लगे. जब टीम का स्कोर नौ था तभी ग्रेम स्मिथ दो रन बनाकर मोर्केल के शिकार बने.
इसके बाद रॉब क्विनी ने 28 रनों का योगदान देकर पारी संभालने की कोशिश की लेकिन वो टिक नहीं सके और सुरेश रैना के शिकार बने.
इसके बाद सिर्फ़ रवींद्र जडेजा ही ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने जम कर शॉट लगाए और 37 रन बनाए. यूसुफ़ पठान का नहीं चल पाना राजस्थान के लिए बड़ा झटका था. वो सिर्फ़ दस रन बनाकर आउट हो गए.
रैना की धमाकेदार पारी
टॉस हारकर बैटिंग करने उतरी सुपर किंग्स की शुरुआत काफ़ी ख़राब रही. मैथ्यू हेडन और पार्थिव पटेल जल्दी-जल्दी आउट हो गए.
यूसुफ़ पठान आज रंग में नहीं दिखे
लेकिन उसके बाद लड़खड़ाई टीम को सुरेश रैना ने संभाला और तेज़ी से रन बनाए. रैना ने सिर्फ 55 गेंदों में 98 रनों की शानदार पारी खेली.
स्कोर में दो बड़ी साझीदारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा. रैना ने पहले तीसरे विकेट के लिए बद्रीनाथ के साथ अर्धशतकीय साझीदारी की और फिर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के साथ पांचवें विकेट के लिए नायाब 71 रन जोड़े.
धौनी 22 और मोर्कल चार रन बनाकर अंत तक नाबाद रहे.
रैना और बद्रीनाथ (29) ने संयम के साथ खेलते हुए तीसरे विकेट के लिए 67 रन जोड़े. इस साझेदारी को शेन वॉर्न ने तोड़ा.
अगले बल्लेबाज जैकब ओरम भी जल्दी चलते बने. उन्हें मुनाफ़ पटेल ने दो रन के निजी स्कोर पर पैवेलियन भेजा
Thursday, April 30, 2009
ख़ुश हूँ पर संतुष्ट नहीं: बराक ओबामा
राष्ट्रपति ओबामा का कहना था कि अमरीका में अभी बहुत कुछ करने की ज़रूरत है
अमरीका के राष्ट्रपति ओबामा ने कहा है कि इस पद पर उनके शुरुआती सौ दिन कामयाब रहे हैं लेकिन अभी और बहुत कुछ करना बाक़ी है.
उन्होंने कहा, "अब तक की प्रगति से मैं प्रसन्न हूँ लेकिन संतुष्ट नहीं हूँ".
बराक ओबामा ने इस पद पर सौ दिन पूरे करने के मौक़े पर अपनी कुछ भावी योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की.
उन्होंने पहले सेंट लुई के टाउन हॉल में एक सभा को संबोधित किया और फिर टेलीविज़न पर सीधे प्रसारित हुए एक संवाददाता सम्मेलन में हिस्सा लिया.
राष्ट्रपति ओबामा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह नहीं जानते थे कि पद संभालते ही उन्हें इतनी बड़ी आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ेगा.
उन्होंने कई उन अहम सवालों के जवाब दिए जिनसे उनका प्रसाशन अमरीका में और विदेश में जूझ रहा है.
मुख्य बिंदु
राष्ट्रपति ओबामा की कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ इस प्रकार थीं:
• पाकिस्तान सरकार बहुत नाज़ुक मोड़ पर है लेकिन उन्हें यक़ीन है कि वहाँ का परमाणु भंडार चरमपंथियों के हाथों में नहीं जाएगा.
• इराक़ में एक के बाद एक घातक बम हमले चिंता का विषय हैं लेकिन उनकी संख्या पिछले साल के मुक़ाबले कम है.
• बुश प्रशासन के दिनों में जारी कड़ी जाँच प्रक्रिया के ख़िलाफ़ जो क़दम उठाए गए हैं उनसे आने वाले समय में अमरीका मज़बूत और अधिक सुरक्षित बनेगा.
• सरकार को मुश्किल का सामना कर रहे कार निर्माताओं क्रिसलर और जनरल मोटर्स को स्थिर करने में हर संभव सहायता देनी चाहिए लेकिन उसके बाद इस प्रक्रिया से पूरी तरह अलग हो जाना चाहिए.
• आप्रवासन के मामले पर अमरीका एक 'खंडित व्यवस्था' को जारी नहीं रख सकता बल्कि उसे इस प्रक्रिया को एक व्यापक रूप देना होगा.
बजट को मंज़ूरी
अमरीकी संसद ने ओबामा के सौ दिन पूरे होने पर 2010 के लिए एक 3.4 खरब डॉलर को मंज़ूरी दी और राष्ट्रपति का कहना था कि इससे अर्थव्यवस्था को मंदी से निकल कर सुधार के रास्ते पर जाने में मदद मिलेगी.
अब शुरुआती दौर की समाप्ति के बाद अपेक्षा की जा रही है कि राष्ट्रपति ओबामा सभी अमरीकावासियों को स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराने और दुनिया भर में बढ़ते तापमान से निबटने की अपनी योजना को अमल में लाने के काम में जुट जाएँगे.
अमरीका में यह परंपरा रही है कि विश्लेषक राष्ट्रपति की शुरूआती सफलताओं और विफलताओं का जायज़ा लेने के लिए कुछ मापदंडों का इस्तेमाल करते हैं और नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि बराक ओबामा की लोकप्रियता बरक़रार है.
अमरीका के राष्ट्रपति ओबामा ने कहा है कि इस पद पर उनके शुरुआती सौ दिन कामयाब रहे हैं लेकिन अभी और बहुत कुछ करना बाक़ी है.
उन्होंने कहा, "अब तक की प्रगति से मैं प्रसन्न हूँ लेकिन संतुष्ट नहीं हूँ".
बराक ओबामा ने इस पद पर सौ दिन पूरे करने के मौक़े पर अपनी कुछ भावी योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की.
उन्होंने पहले सेंट लुई के टाउन हॉल में एक सभा को संबोधित किया और फिर टेलीविज़न पर सीधे प्रसारित हुए एक संवाददाता सम्मेलन में हिस्सा लिया.
राष्ट्रपति ओबामा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह नहीं जानते थे कि पद संभालते ही उन्हें इतनी बड़ी आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ेगा.
उन्होंने कई उन अहम सवालों के जवाब दिए जिनसे उनका प्रसाशन अमरीका में और विदेश में जूझ रहा है.
मुख्य बिंदु
राष्ट्रपति ओबामा की कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ इस प्रकार थीं:
• पाकिस्तान सरकार बहुत नाज़ुक मोड़ पर है लेकिन उन्हें यक़ीन है कि वहाँ का परमाणु भंडार चरमपंथियों के हाथों में नहीं जाएगा.
• इराक़ में एक के बाद एक घातक बम हमले चिंता का विषय हैं लेकिन उनकी संख्या पिछले साल के मुक़ाबले कम है.
• बुश प्रशासन के दिनों में जारी कड़ी जाँच प्रक्रिया के ख़िलाफ़ जो क़दम उठाए गए हैं उनसे आने वाले समय में अमरीका मज़बूत और अधिक सुरक्षित बनेगा.
• सरकार को मुश्किल का सामना कर रहे कार निर्माताओं क्रिसलर और जनरल मोटर्स को स्थिर करने में हर संभव सहायता देनी चाहिए लेकिन उसके बाद इस प्रक्रिया से पूरी तरह अलग हो जाना चाहिए.
• आप्रवासन के मामले पर अमरीका एक 'खंडित व्यवस्था' को जारी नहीं रख सकता बल्कि उसे इस प्रक्रिया को एक व्यापक रूप देना होगा.
बजट को मंज़ूरी
अमरीकी संसद ने ओबामा के सौ दिन पूरे होने पर 2010 के लिए एक 3.4 खरब डॉलर को मंज़ूरी दी और राष्ट्रपति का कहना था कि इससे अर्थव्यवस्था को मंदी से निकल कर सुधार के रास्ते पर जाने में मदद मिलेगी.
अब शुरुआती दौर की समाप्ति के बाद अपेक्षा की जा रही है कि राष्ट्रपति ओबामा सभी अमरीकावासियों को स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराने और दुनिया भर में बढ़ते तापमान से निबटने की अपनी योजना को अमल में लाने के काम में जुट जाएँगे.
अमरीका में यह परंपरा रही है कि विश्लेषक राष्ट्रपति की शुरूआती सफलताओं और विफलताओं का जायज़ा लेने के लिए कुछ मापदंडों का इस्तेमाल करते हैं और नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि बराक ओबामा की लोकप्रियता बरक़रार है.
चुनाव के तीसरे चरण में मतदान जारी
भारत में लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में नौ राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में 107 चुनाव क्षेत्रों पर मतदान जारी है.
पश्चिम बंगाल के परुलिया ज़िले के बिरांडी में एक मतदान केंद्र के बाहर बारूदी सुरंग का विस्फोट हुआ है जिसमें अर्धसैनिक बलों का एक जवान घायल हुए हैं. लेकिन अन्य जगहों पर मतदान शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है.
मध्यप्रदेश और गुजरात में अनेक जगहों पर बढ़ती गर्मी से बचने के लिए सुबह ही मतदाताओं की लंबी कतारे देखी गई हैं. लेकिन भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर और मुंबई में सुबह मतदान धीमी गति से हो रहा है.
पहले दो चरणों में कुल 543 लोकसभा सीटों में से 265 सीटों के लिए मतदान हो चुका है, जो छिटपुट घटनाओं को छोड़कर शांतिपूर्ण रहा था.
तीसरे चरण में कुल 1567 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं जिनमें 101 महिला उम्मीदवार हैं. इस चरण में लगभग साढ़े चौदह करोड़ मतदाता हैं और उनके लिए कुल एक लाख 65 हज़ार 112 मतदान केंद्र बनाए गए हैं.
कहीं धीमा तो कहीं तेज़ मतदान
तीसरे चरण की सीटें
उत्तर प्रदेश की 15
बिहार की 11
गुजरात की सभी 26
मध्यप्रदेश की 16
महाराष्ट्र की 10
पश्चिम बंगाल की 14
कर्नाटक की 11
जम्मू-कश्मीर की एक
सिक्किम की एक
दादर नगर हवेली की एक
दमन एवं दीव की एक
भारतीय चुनाव आयोग
गुरुवार जिन प्रमुख नेताओं के भाग्य का फ़ैसला होना है उनमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी और भूतपूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा शामिल हैं.
भाजपा नेता जसवंत सिंह पश्चिम बंगाल के दार्जीलिंग से, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता सैय्यद शाहनवाज़ हुसैन बिहार के भागलपुर से, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्यप्रदेश के गुना से और केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल उत्तर प्रदेश के कानपुर से, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एस बंगरप्पा और जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव भी इस चरण में अपना भाग्य आज़मा रहे हैं.
गुजरात के गांधीनगर में मौजूद बीबीसी संवाददाता विनीत खरे के अनुसार पूरे शहर में पुख़्ता सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं. उनका कहना है कि कुछ संवेदनशील मतदान केंद्रों में तो संवाददाताओं को भी मतदान केंद्र से सौ मीटर दूर रहने को कहा गया है. सुबह मतदाताओं में उत्साह नज़र आया और पुरुषों के मुकाबले में ज़्यादा महिलाएँ मतदान केंद्रों पर नज़र आ रही हैं.
उधर अपना वोट डालने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास जताया कि 'गुजरात की परंपरा के अनुसार शांतिपूर्ण मतदान होगा और गर्मी के बावजूद लोग बड़ी संख्या में वोट डालेंगे.'
गुजरात में सभी 26 सीटों के लिए मतदान हो रहा है और विनीत खरे के मुताबिक वहाँ कुल 42 हज़ार 500 मतदान केंद्रों में से 6000 को संवेदनशील घोषित किया गया है और सुरक्षा बलों की 86 क्विक रेस्पॉंस टीमों को तैनात किया गया है.
उधर मुंबई में मौजूद बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद के अनुसार मतदाताओं में सुबह तक तो कोई ज़्यादा उत्साह नहीं नज़र आया और मतदान की गति धीमी है. महाराष्ट्र में कुल 10 सीटों पर तीसरे चरण में मतदान हो रहा है. दक्षिणी मुंबई में मौजूद बीबीसी संवाददाता सुझील झा ने बताया है कि मतदान धीमी गति से हो रहा है और सुबह मतदान केंद्रों पर ज़्यादातर बुज़ुर्ग लोग वोट डालने के लिए आते देखे गए हैं. ये वही इलाक़ा है जहाँ पिछले साल नवंबर में हमले हुए थे.
बिहार में मधेपुरा मौजूद बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर ने बताया है कि कोसी इलाक़े में मतदान शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है. उनका कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि कोसी में आठ महीने पहले आई बाढ़ से जनता में जो गुस्सा था वह कुछ ठंडा पड़ा है.
देश में अनेक प्रांतों में भारी सुरक्षा के बीच चुनाव हो रहा है
मणिकांत ठाकुर का कहना है कि जनता दल (यू) नेता नीतीश कुमार के पक्ष में विकास के आधार पर जो प्रचार चल रहा था, उसकी प्रतिक्रिया में राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद के समर्थकों में इस चरण में कुछ एकजुटता दिखाई दी है और बिहार में तीसरे चरण में 11 सीटों पर कांटे की टक्कर दिखाई दे रही है.
मध्यप्रदेश में इंदौर में मौजूद बीबीसी संवाददाता पल्लवी जैन के मुताबिक वहाँ के मालवा क्षेत्र में महिला मतदाताओं में ख़ासा उत्साह दिखाई दे रहा है. इस चरण में मध्यप्रदेश की 16 सीटों पर मतदान हो रहा है. उनके अनुसार पिछले लगभग डेढ़ दशक से राज्य के मालवा क्षेत्र में भाजपा का वर्चस्व दिखा है लेकिन पिछले विधानसभा चुनावों के बात कांग्रेस की स्थिति कुछ सुधरी है. पल्लवी जैन का कहना है कि राज्य में कोई लहर नज़र नहीं आ रही लेकिन उसका पलड़ा भारी ज़रूर दिख रहा है.
लखनऊ में मौजूद बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी का कहना था कि वहाँ कड़े सुरक्षा इंतजाम के बीच मतदान हो रहा है. सुरक्षा बलों के जवान कई जगहों पर गाड़ियों पर सवार होकर गश्त भी लगा रहे हैं. जब बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती अपना वोट डालने आई तो उनका कहना था, "अन्य लोगों को जो सलाह मैं दे रही थी, उसी के मुताबिक में सबसे पहले बिना चाय-नाश्ता लिए सबसे पहले अपने पार्टी के उम्मीदवार को वोट डालने आई हूँ."
पश्चिम बंगाल की 14 सीटों पर चुनाव हो रहा है. बीबीसी संवाददाता सुबीर भौमिक का कहना है उत्तरी बंगाल में माओवादियों ने चुनाव बहिष्कार का आहवान किया है और स्थिति संवेदनशील है. उनके अनुसार बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और कम से कम 2500 अर्धसैनिक बलों के जवान और इतने ही पश्चिम बंगाल पुलिस के जवान इस क्षेत्र में तैनात हैं.
चुनाव के तीसरे चरण तक पहुँचते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा है कि भारत एक त्रिशंकु लोकसभा की ओर बढ़ रहा है...एनडीए, यूपीए और तीसरे मोर्चे के गठबंधनों में शामिल दल चुनावों के बाद इधर-उधर का रुख़ कर सकते हैं और आज नज़र आ रहे समीकरण चुनाव के बाद ख़ासे बदल सकते हैं
संजीव श्रीवास्तव, बीबीसी हिंदी के भारत संपादक
सुबीर भौमिक के अनुसार राज्य में सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का कहना है कि माओवादियों ने बहिष्कार का आहवान ममता बनर्जी की त्रिणमूल कांग्रेस को मदद देने के लिए किया है. हालाँकि उनका ये भी कहना है कि यदि मतदान कम होता है तो उसका ज़्यादा फ़ायदा सीपीएम को ही होगा.
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में पुलवामा में मौजूद बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन का कहना है कि मतदान बहुत धीमी गति से चल रहा है और लोगों में इस बार कोई ख़ास उत्साह नज़र नहीं आ रहा. वहाँ तीसरे चरण में एक सीट पर मतदान हो रहा है.
'त्रिशंकु लोकसभा की ओर'
मुंबई में मौजूद बीबीसी हिंदी के भारत संपादक संजीव श्रीवास्तव का आकलन है, "चुनाव के तीसरे चरण तक पहुँचते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा है कि भारत एक त्रिशंकु लोकसभा की ओर बढ़ रहा है. शायद ही कोई गठबंधन 272 के आंकड़े तक पहुँच पाए और स्पष्ट बहुमत हासिल कर पाए."
संजीव श्रीवास्तव का ये भी मानना है कि एनडीए, यूपीए और तीसरे मोर्चे के गठबंधनों में जो दल शामिल हैं वे चुनावों के बाद इधर-उधर का रुख़ कर सकते हैं और आज नज़र आ रहे समीकरण चुनाव के बाद ख़ासे बदले हुए नज़र आ सकते हैं.
तीसरे चरण में सिक्किम विधानसभा के लिए भी चुनाव हो रहा है जहाँ विधानसभा की कुल 32 सीटों के लिए मतदान होना है.
चुनाव को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए चुनाव आयोग ने बड़े पैमाने पर पुलिस और सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है.
चुनाव के पहले चरण में 16 अप्रैल को देश के 15 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की 124 सीटों पर लगभग 60 प्रतिशत मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया था.
दूसरे चरण में 23 अप्रैल को 12 राज्यों के 140 संसदीय क्षेत्रों में मतदान 55 फ़ीसदी मतदान हुआ था.
पश्चिम बंगाल के परुलिया ज़िले के बिरांडी में एक मतदान केंद्र के बाहर बारूदी सुरंग का विस्फोट हुआ है जिसमें अर्धसैनिक बलों का एक जवान घायल हुए हैं. लेकिन अन्य जगहों पर मतदान शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है.
मध्यप्रदेश और गुजरात में अनेक जगहों पर बढ़ती गर्मी से बचने के लिए सुबह ही मतदाताओं की लंबी कतारे देखी गई हैं. लेकिन भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर और मुंबई में सुबह मतदान धीमी गति से हो रहा है.
पहले दो चरणों में कुल 543 लोकसभा सीटों में से 265 सीटों के लिए मतदान हो चुका है, जो छिटपुट घटनाओं को छोड़कर शांतिपूर्ण रहा था.
तीसरे चरण में कुल 1567 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं जिनमें 101 महिला उम्मीदवार हैं. इस चरण में लगभग साढ़े चौदह करोड़ मतदाता हैं और उनके लिए कुल एक लाख 65 हज़ार 112 मतदान केंद्र बनाए गए हैं.
कहीं धीमा तो कहीं तेज़ मतदान
तीसरे चरण की सीटें
उत्तर प्रदेश की 15
बिहार की 11
गुजरात की सभी 26
मध्यप्रदेश की 16
महाराष्ट्र की 10
पश्चिम बंगाल की 14
कर्नाटक की 11
जम्मू-कश्मीर की एक
सिक्किम की एक
दादर नगर हवेली की एक
दमन एवं दीव की एक
भारतीय चुनाव आयोग
गुरुवार जिन प्रमुख नेताओं के भाग्य का फ़ैसला होना है उनमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी और भूतपूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा शामिल हैं.
भाजपा नेता जसवंत सिंह पश्चिम बंगाल के दार्जीलिंग से, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता सैय्यद शाहनवाज़ हुसैन बिहार के भागलपुर से, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्यप्रदेश के गुना से और केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल उत्तर प्रदेश के कानपुर से, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एस बंगरप्पा और जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव भी इस चरण में अपना भाग्य आज़मा रहे हैं.
गुजरात के गांधीनगर में मौजूद बीबीसी संवाददाता विनीत खरे के अनुसार पूरे शहर में पुख़्ता सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं. उनका कहना है कि कुछ संवेदनशील मतदान केंद्रों में तो संवाददाताओं को भी मतदान केंद्र से सौ मीटर दूर रहने को कहा गया है. सुबह मतदाताओं में उत्साह नज़र आया और पुरुषों के मुकाबले में ज़्यादा महिलाएँ मतदान केंद्रों पर नज़र आ रही हैं.
उधर अपना वोट डालने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास जताया कि 'गुजरात की परंपरा के अनुसार शांतिपूर्ण मतदान होगा और गर्मी के बावजूद लोग बड़ी संख्या में वोट डालेंगे.'
गुजरात में सभी 26 सीटों के लिए मतदान हो रहा है और विनीत खरे के मुताबिक वहाँ कुल 42 हज़ार 500 मतदान केंद्रों में से 6000 को संवेदनशील घोषित किया गया है और सुरक्षा बलों की 86 क्विक रेस्पॉंस टीमों को तैनात किया गया है.
उधर मुंबई में मौजूद बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद के अनुसार मतदाताओं में सुबह तक तो कोई ज़्यादा उत्साह नहीं नज़र आया और मतदान की गति धीमी है. महाराष्ट्र में कुल 10 सीटों पर तीसरे चरण में मतदान हो रहा है. दक्षिणी मुंबई में मौजूद बीबीसी संवाददाता सुझील झा ने बताया है कि मतदान धीमी गति से हो रहा है और सुबह मतदान केंद्रों पर ज़्यादातर बुज़ुर्ग लोग वोट डालने के लिए आते देखे गए हैं. ये वही इलाक़ा है जहाँ पिछले साल नवंबर में हमले हुए थे.
बिहार में मधेपुरा मौजूद बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर ने बताया है कि कोसी इलाक़े में मतदान शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है. उनका कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि कोसी में आठ महीने पहले आई बाढ़ से जनता में जो गुस्सा था वह कुछ ठंडा पड़ा है.
देश में अनेक प्रांतों में भारी सुरक्षा के बीच चुनाव हो रहा है
मणिकांत ठाकुर का कहना है कि जनता दल (यू) नेता नीतीश कुमार के पक्ष में विकास के आधार पर जो प्रचार चल रहा था, उसकी प्रतिक्रिया में राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद के समर्थकों में इस चरण में कुछ एकजुटता दिखाई दी है और बिहार में तीसरे चरण में 11 सीटों पर कांटे की टक्कर दिखाई दे रही है.
मध्यप्रदेश में इंदौर में मौजूद बीबीसी संवाददाता पल्लवी जैन के मुताबिक वहाँ के मालवा क्षेत्र में महिला मतदाताओं में ख़ासा उत्साह दिखाई दे रहा है. इस चरण में मध्यप्रदेश की 16 सीटों पर मतदान हो रहा है. उनके अनुसार पिछले लगभग डेढ़ दशक से राज्य के मालवा क्षेत्र में भाजपा का वर्चस्व दिखा है लेकिन पिछले विधानसभा चुनावों के बात कांग्रेस की स्थिति कुछ सुधरी है. पल्लवी जैन का कहना है कि राज्य में कोई लहर नज़र नहीं आ रही लेकिन उसका पलड़ा भारी ज़रूर दिख रहा है.
लखनऊ में मौजूद बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी का कहना था कि वहाँ कड़े सुरक्षा इंतजाम के बीच मतदान हो रहा है. सुरक्षा बलों के जवान कई जगहों पर गाड़ियों पर सवार होकर गश्त भी लगा रहे हैं. जब बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती अपना वोट डालने आई तो उनका कहना था, "अन्य लोगों को जो सलाह मैं दे रही थी, उसी के मुताबिक में सबसे पहले बिना चाय-नाश्ता लिए सबसे पहले अपने पार्टी के उम्मीदवार को वोट डालने आई हूँ."
पश्चिम बंगाल की 14 सीटों पर चुनाव हो रहा है. बीबीसी संवाददाता सुबीर भौमिक का कहना है उत्तरी बंगाल में माओवादियों ने चुनाव बहिष्कार का आहवान किया है और स्थिति संवेदनशील है. उनके अनुसार बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और कम से कम 2500 अर्धसैनिक बलों के जवान और इतने ही पश्चिम बंगाल पुलिस के जवान इस क्षेत्र में तैनात हैं.
चुनाव के तीसरे चरण तक पहुँचते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा है कि भारत एक त्रिशंकु लोकसभा की ओर बढ़ रहा है...एनडीए, यूपीए और तीसरे मोर्चे के गठबंधनों में शामिल दल चुनावों के बाद इधर-उधर का रुख़ कर सकते हैं और आज नज़र आ रहे समीकरण चुनाव के बाद ख़ासे बदल सकते हैं
संजीव श्रीवास्तव, बीबीसी हिंदी के भारत संपादक
सुबीर भौमिक के अनुसार राज्य में सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का कहना है कि माओवादियों ने बहिष्कार का आहवान ममता बनर्जी की त्रिणमूल कांग्रेस को मदद देने के लिए किया है. हालाँकि उनका ये भी कहना है कि यदि मतदान कम होता है तो उसका ज़्यादा फ़ायदा सीपीएम को ही होगा.
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में पुलवामा में मौजूद बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन का कहना है कि मतदान बहुत धीमी गति से चल रहा है और लोगों में इस बार कोई ख़ास उत्साह नज़र नहीं आ रहा. वहाँ तीसरे चरण में एक सीट पर मतदान हो रहा है.
'त्रिशंकु लोकसभा की ओर'
मुंबई में मौजूद बीबीसी हिंदी के भारत संपादक संजीव श्रीवास्तव का आकलन है, "चुनाव के तीसरे चरण तक पहुँचते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा है कि भारत एक त्रिशंकु लोकसभा की ओर बढ़ रहा है. शायद ही कोई गठबंधन 272 के आंकड़े तक पहुँच पाए और स्पष्ट बहुमत हासिल कर पाए."
संजीव श्रीवास्तव का ये भी मानना है कि एनडीए, यूपीए और तीसरे मोर्चे के गठबंधनों में जो दल शामिल हैं वे चुनावों के बाद इधर-उधर का रुख़ कर सकते हैं और आज नज़र आ रहे समीकरण चुनाव के बाद ख़ासे बदले हुए नज़र आ सकते हैं.
तीसरे चरण में सिक्किम विधानसभा के लिए भी चुनाव हो रहा है जहाँ विधानसभा की कुल 32 सीटों के लिए मतदान होना है.
चुनाव को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए चुनाव आयोग ने बड़े पैमाने पर पुलिस और सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है.
चुनाव के पहले चरण में 16 अप्रैल को देश के 15 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की 124 सीटों पर लगभग 60 प्रतिशत मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया था.
दूसरे चरण में 23 अप्रैल को 12 राज्यों के 140 संसदीय क्षेत्रों में मतदान 55 फ़ीसदी मतदान हुआ था.
Wednesday, April 29, 2009
'पाकिस्तानी सेना ने अहम कस्बे पर कब्ज़ा किया'
सेना ने बुनेर के आसपास सैनिक अभियान शुरु किया था
पाकिस्तानी सेना का कहना है कि उसने बुनेर ज़िले के एक अहम कस्बे पर नियंत्रण कर लिया है. मंगलवार को सेना ने तालेबान के ख़िलाफ़ अभियान शुरु किया था.
हेलीकॉप्टरों के ज़रिए सैनिकों को दागर ज़िले में पहुँचाया गया था. ये इलाक़ा राजधानी इस्लामाबाद से 100 किलोमीटर की भी कम दूरी पर है.
पाकिस्तान सरकार इस बात को लेकर चिंतित है कि तालेबान स्वात घाटी के बाहर अपना नियंत्रण बढ़ाना चाहती है. स्वात के ज़्यादातर हिस्सों पर पहले से ही तालेबान का कब्ज़ा है.
सेना के प्रवक्ता ने कहा, "हेलीकॉप्टरों के ज़रिए आए सैनिक ज़मीन पर तैनात सैनिकों के साथ जुड़ गए हैं."
मंगलवार दोपहर को पाकिस्तानी सेना ने स्वात घाटी में अभियान शुरु किया था और चरमपंथियों के ठिकानों को निशाना बनाया था.
सैन्य अभियान
जब सेना आई तो सुबह काफ़ी गोलीबारी हुई. इलाक़े में कर्फ़्यू लगा है और हमें घरों से बाहर आने की इजाज़त नहीं है. हम काफी चिंतित है.
सलीम दील खान
बुधवार को चले अभियान के दौरान हताहतों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई.
दागर में रहने वाले सलीम दिल खान ने बताया, "जब सेना आई तो सुबह काफ़ी गोलीबारी हुई. इलाक़े में कर्फ़्यू लगा है और हमें घरों से बाहर आने की इजाज़त नहीं है. हम काफी चिंतित है."
पाकिस्तान सरकार का कहना है कि बुनेर में करीब 500 तालेबान लड़ाके हैं जो शांति समझौते के खिलाफ़ है.
सरकार और तालेबान के बीच हुए शांति समझौते के बाद मालाकंद डिवीज़न में शरिया कानून लागू हो गया है- इसमें बुनेर, स्वात घाटी और निचला दीर इलाक़ा शामिल है. बदले में तालेबान को हथियार डालने थे.
एएफ़पी के मुताबिक सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल अथर अब्बास ने कहा है कि दीर के निचले इलाक़े में संघर्ष ख़त्म हो गया है.
सेना के मुताबिक इसमें 75 चरमपंथी और 10 सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं.
पाकिस्तानी सेना का कहना है कि उसने बुनेर ज़िले के एक अहम कस्बे पर नियंत्रण कर लिया है. मंगलवार को सेना ने तालेबान के ख़िलाफ़ अभियान शुरु किया था.
हेलीकॉप्टरों के ज़रिए सैनिकों को दागर ज़िले में पहुँचाया गया था. ये इलाक़ा राजधानी इस्लामाबाद से 100 किलोमीटर की भी कम दूरी पर है.
पाकिस्तान सरकार इस बात को लेकर चिंतित है कि तालेबान स्वात घाटी के बाहर अपना नियंत्रण बढ़ाना चाहती है. स्वात के ज़्यादातर हिस्सों पर पहले से ही तालेबान का कब्ज़ा है.
सेना के प्रवक्ता ने कहा, "हेलीकॉप्टरों के ज़रिए आए सैनिक ज़मीन पर तैनात सैनिकों के साथ जुड़ गए हैं."
मंगलवार दोपहर को पाकिस्तानी सेना ने स्वात घाटी में अभियान शुरु किया था और चरमपंथियों के ठिकानों को निशाना बनाया था.
सैन्य अभियान
जब सेना आई तो सुबह काफ़ी गोलीबारी हुई. इलाक़े में कर्फ़्यू लगा है और हमें घरों से बाहर आने की इजाज़त नहीं है. हम काफी चिंतित है.
सलीम दील खान
बुधवार को चले अभियान के दौरान हताहतों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई.
दागर में रहने वाले सलीम दिल खान ने बताया, "जब सेना आई तो सुबह काफ़ी गोलीबारी हुई. इलाक़े में कर्फ़्यू लगा है और हमें घरों से बाहर आने की इजाज़त नहीं है. हम काफी चिंतित है."
पाकिस्तान सरकार का कहना है कि बुनेर में करीब 500 तालेबान लड़ाके हैं जो शांति समझौते के खिलाफ़ है.
सरकार और तालेबान के बीच हुए शांति समझौते के बाद मालाकंद डिवीज़न में शरिया कानून लागू हो गया है- इसमें बुनेर, स्वात घाटी और निचला दीर इलाक़ा शामिल है. बदले में तालेबान को हथियार डालने थे.
एएफ़पी के मुताबिक सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल अथर अब्बास ने कहा है कि दीर के निचले इलाक़े में संघर्ष ख़त्म हो गया है.
सेना के मुताबिक इसमें 75 चरमपंथी और 10 सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं.
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