भारतीय संसद का बजट सत्र शुरु हो गया है. पंद्रहवीं लोकसभा के कार्यकाल का ये पहला बजट सत्र है.
लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट के साये में शुरू हुए इस बजट सत्र से पहले राजनीतिक दलों ने एकजुटता के साथ सदन की कार्यवाही को चलने देने का वादा किया है.
पर विशेषज्ञों का मानना है कि बाबरी विध्वंस पर रिपोर्ट का 17 साल बाद पूरा होकर सामने आना एक मुद्दा बनकर उछल सकता है.
गुरुवार को सदन में भारत का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाना है जिसमें सरकार के लाभ और घाटे का लेखाजोखा सामने लाया जाएगा.
इसके बाद तीन जुलाई को रेल मंत्री ममता बनर्जी रेल बजट पेश करेंगी.
रेल बजट पर लोगों की नज़र भी है और वे देखना चाहते हैं कि ममता लालू प्रसाद से कितना अलग और कैसा बजट लोगों के सामने रखती हैं.
कैसा होगा आम बजट
पर सबकी नज़रें आम बजट पर टिकी हैं. आम लोगों की जिज्ञासा है कि क्या वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी आम आदमी की पसंद और सहूलियत वाला बजट दे पाने में सक्षम होंगे.
सरकार के बजट को लेकर इसलिए भी उत्सुकता है क्योंकि बजट सत्र की शुरुआत से ठीक पहले तेल के दामों में बढ़ोत्तरी कर दी गई है.
पर कुछ क्षेत्रों में लोग राहत की भी उम्मीद लगाए बैठे हैं.
इसके अलावा बजट सत्र के साथ-साथ लोगों का ध्यान सरकार के विभागवार 100 दिन के कार्यक्रम को लागू करने के प्रयासों पर भी होगी.
सरकार महिला आरक्षण बिल और खाद्य सुरक्षा क़ानून जैसे वादे भी लोगों से कर चुकी है और उनकी चर्चा भी इस बजट सत्र के दौरान सदन में गरमाहट पैदा कर सकती है.
Thursday, July 2, 2009
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