Subscribe

RSS Feed (xml)



Powered By

Skin Design:
Free Blogger Skins

Powered by Blogger

Saturday, May 9, 2009

हिंदू रिवाज के मुताबिक नहीं होगा संस्कार

दविंदर घई चाहते हैं कि हिंदू रिवाज़ के मुताबिक खेल में अतिंम संस्कार हो
ब्रिटेन में हिंदू रीति रिवाजों के मुतबिक दाह संस्कार किए जाने की अनुमति माँगने वाले दविंदर घई लंदन हाई कोर्ट में मामला हार गए हैं.
न्यूकास्ल में रहने वाले 70 वर्षीय दविंदर को सिटी काउंसिल ने इस बात की इजाज़त नहीं दी थी कि उनका अंतिम संस्कार पारंपरिक हिंदू रिवाजों के मुताबिक खुले में किया जाए. दविंदर कहते हैं कि ये उनकी अंतिम इच्छा है.
दविंदर ने बाद में ऊपरी अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था.
उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा था कि उनके धर्म में चिता जलाना आवश्यक है ताकि उन्हें मुक्ति मिल सके. दविंदर का कहना था कि वे 'इज़्ज़त' के साथ मरना चाहते हैं और नहीं चाहते कि उन्हें 'बक्से में बंद' कर दिया जाए.
एपी के मुताबिक जज ने कहा कि वहाँ चिता जलाना क़ानून के तहत मना है. जज का कहना था कि क़ानून मंत्री जैक स्ट्रा का तर्क है कि चिता जलाने से कुछ लोगों को आपत्ति हो सकती है और मानव शरीर को इस तरह जलाने को वो ठीक नहीं समझते.
जज का कहना था कि ये संवेदनशील मामला है लेकिन अदालत को चुने हुए प्रतिनिधियों की बातों का सम्मान करना होगा.
न्यूकास्ल सिटी काउंसिल का तर्क ये था कि शमशान घाट या क्रिमीटोरियम के बाहर मानव अवशेषों का जलाना 1902 के क्रेमिटोरियम एक्ट के तहत मना है.
अगर घई ये मुकदमा जीत गए होते तो ब्रिटेन में रहने वाले करीब पाँच लाख से ज़्यादा हिंदुओं के लिए ये ऐतिहासिक फ़ैसला होता.

No comments: